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बिल्डर व ठेकेदार

कॉन्ट्रैक्टर ऑल-रिस्क (CAR) बीमा राशि व Average Clause कैलकुलेटर

कंस्ट्रक्शन फाइनेंस देने वाले बैंक ऋण वितरण से पहले प्रोजेक्ट की Contractor's All Risk (CAR) पॉलिसी बैंक के पक्ष में (Bank Clause) असाइन करवाते हैं। निर्माण लागत को 15% या 20% कम दिखाने पर क्लेम के समय Average Clause लागू हो जाता है और अनिवार्य एक्सेस (deductible) घटाने से पहले ही आपका मुआवज़ा उसी अनुपात में कट जाता है। यह कैलकुलेटर Section 1 मटेरियल डैमेज, Section 2 थर्ड-पार्टी लायबिलिटी (TPL) और 18% GST की सटीक गणना करता है।

  • मुफ़्त, साइन-अप की ज़रूरत नहीं
  • आपके ब्राउज़र में ही चलता है — आपकी डाली गई जानकारी हमें नहीं भेजी जाती
  • तरीका और स्रोत नीचे दिए गए हैं
  • समीक्षा

कैलकुलेटर

Section 1 — मटेरियल डैमेज और ऐड-ऑन

सिविल, स्ट्रक्चरल, फिनिशिंग और MEP सहित 100% पूर्ण निर्माण लागत।

डेवलपर द्वारा मुफ़्त दिया गया स्टील, सीमेंट, लिफ़्ट या अन्य सामग्री।

निर्माण के दौरान लागत बढ़ने के लिए आमतौर पर 10% से 25%।

अनुबंध मूल्य का आमतौर पर 5% से 10%।

साइट पर या सटे हुए ढांचों की सुरक्षा।

टावर क्रेन, बैचिंग प्लांट, होइस्ट और साइट मशीनरी।

Section 2 — थर्ड-पार्टी लायबिलिटी और अवधि

शहरी और रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए आमतौर पर 10% से 20%।

खुदाई से लेकर OC मिलने तक के महीने।

उदाहरणार्थ: प्रति ₹1,000 बीमा राशि पर वार्षिक 1.50‰ से 3.00‰ (18% GST से पहले)।

अंडर-इंश्योरेंस (Average Clause) क्लेम परीक्षण

Average Clause कटौती जांचने के लिए पूर्ण मूल्य से कम राशि डालकर देखें।

शुद्ध क्लेम भुगतान जांचने के लिए उदाहरणार्थ नुकसान राशि।

Average Clause लगाने के बाद क्लेम से घटने वाली राशि।

गणना विवरण

आपके आंकड़े आपके ब्राउज़र में ही रहते हैं। आप जो लिंक कॉपी करते हैं उसमें ये शामिल होते हैं, इसलिए इसे केवल भरोसेमंद लोगों के साथ ही साझा करें।

पद्धति

यह गणना कैसे होती है

Section 1 SI = (अनुबंध + प्रमोटर सामग्री) × (1 + महंगाई % + मलबा %) + आसपास की संपत्ति + CPM
देय क्लेम = max(0, नुकसान × min(1, घोषित SI ÷ पूर्ण Section 1 SI) − पॉलिसी एक्सेस)

  • Section 1 (मटेरियल डैमेज): इसमें प्रोजेक्ट का 100% पूर्ण निर्माण मूल्य, प्रमोटर द्वारा दी गई सामग्री, महंगाई प्रावधान (10% से 25%) और मलबा हटाने का खर्च (5% से 10%) शामिल होना चाहिए।
  • Section 2 (थर्ड-पार्टी लायबिलिटी): निर्माण स्थल के आसपास तीसरे पक्ष की संपत्ति या व्यक्ति को आकस्मिक क्षति के लिए कानूनी सुरक्षा, जो आमतौर पर अनुबंध मूल्य का 10% से 20% रखी जाती है।
  • Average Clause (कम बीमा नियम): यदि घोषित बीमा राशि 100% प्रतिस्थापन मूल्य से कम है, तो अंतर के अनुपात में क्लेम पहले कम किया जाता है और उसके बाद एक्सेस घटाया जाता है।
  • GST: इंजीनियरिंग बीमा प्रीमियम पर 18% GST लागू होता है।

यह ऋण स्वीकृति निर्णय या टैक्स/कानूनी सलाह नहीं है। आंकड़े आपके इनपुट पर आधारित सांकेतिक हैं; अंतिम शर्तें, टैक्स नियम और वैधानिक अधिसूचनाएं अपने बैंक, बीमा कंपनी या CA से सत्यापित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लोग जो सवाल पूछते हैं

CAR पॉलिसी में Section 1 बीमा राशि (Sum Insured) कैसे तय होती है?

इंजीनियरिंग बीमा नियमों के अनुसार, Section 1 बीमा राशि प्रोजेक्ट के पूर्ण प्रतिस्थापन मूल्य (100% replacement cost) के बराबर होनी चाहिए: 100% निर्माण अनुबंध मूल्य प्लस प्रमोटर द्वारा दी गई सामग्री, प्लस वैकल्पिक महंगाई प्रावधान (10% से 25%), मलबा हटाना (5% से 10%), आसपास की संपत्ति और मशीनरी (CPM)।

CAR बीमा में Average Clause क्या होता है?

यदि घोषित Section 1 बीमा राशि वास्तविक निर्माण लागत का केवल 80% है, तो बीमा कंपनी किसी भी मान्य क्लेम का केवल 80% ही मंज़ूर करती है और उसमें से पॉलिसी एक्सेस घटाती है।

कंस्ट्रक्शन फाइनेंस बैंक CAR बीमा क्यों अनिवार्य करते हैं?

क्योंकि आग, मानसूनी बाढ़, खुदाई धंसने या थर्ड-पार्टी दुर्घटना से निर्माण रुक सकता है। बैंक 100% निर्माण लागत पर बैंक-क्लॉज़ के साथ CAR पॉलिसी अनिवार्य करते हैं।

सलाहकार से बात करें

निर्माण शुरू कर रहे हैं या कंस्ट्रक्शन फाइनेंस चाहिए?

हम बिल्डरों और सिविल ठेकेदारों को ₹5 करोड़ से ₹500 करोड़ तक कंस्ट्रक्शन फाइनेंस और बैंक नियमों के अनुरूप CAR बीमा दिलाने में मदद करते हैं।

CAR पॉलिसी की शर्तें, दरें, डिडक्टिबल और ऐड-ऑन सीमाएं बीमा कंपनी, बाढ़/भूकंप ज़ोन और प्रोजेक्ट के अनुसार बदलती हैं। अंतिम कोटेशन अवश्य जांचें। ऋणदाता, नियामक और सरकारी कार्यालय अपने नियम लागू करते हैं और अलग तरीके से राउंड या गणना कर सकते हैं; उनके आँकड़े ही मान्य होते हैं। Biz Corp Solutions साझेदार बैंकों, NBFC और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से फंडिंग की व्यवस्था करती है; मंज़ूरी, ब्याज दर और शर्तें ऋणदाता तय करता है। अंतिम समीक्षा: 23 अक्टूबर 2026।