चाहे आप बैंक, NBFC या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के पास जाएँ, कंस्ट्रक्शन फाइनेंस का आकलन मोटे तौर पर एक ही तरह से होता है: लेंडर एक विशेष प्रोजेक्ट का साथ दे रहा होता है और भरोसा चाहता है कि वह बनेगा, बिकेगा और लोन चुकेगा। वे क्या देखते हैं — और इसके पीछे RBI के कौन-से नियम हैं — यह जानने से आप ऐसी फ़ाइल तैयार कर पाते हैं जो जल्दी आगे बढ़े।
संक्षिप्त उत्तर
लेंडर आमतौर पर छह चीज़ें आँकते हैं:
- प्रमोटर — ट्रैक रिकॉर्ड, वित्तीय मज़बूती और इक्विटी कहाँ से आ रही है।
- टाइटल और अनुमतियाँ — ज़मीन का साफ़ टाइटल, बिल्डिंग परमिशन और RERA रजिस्ट्रेशन।
- लागत और फंडिंग योजना — प्रोजेक्ट की कुल लागत और प्रमोटर योगदान सहित उसे कैसे पूरा किया जाएगा।
- बिक्री और कैश फ्लो — बुकिंग, वसूली और क्या प्राप्य राशि बची लागत और कर्ज़ को कवर कर सकती है।
- सिक्योरिटी — प्रोजेक्ट का मॉर्गेज और प्राप्य राशि का हाइपोथिकेशन।
- अनुपालन — लेंडर के लिए RBI नियम और प्रोजेक्ट के लिए RERA नियम।
प्रमोटर और ट्रैक रिकॉर्ड
लेंडर आपके पूरे किए गए प्रोजेक्ट्स का इतिहास, डिलीवरी की समय-सीमा, मौजूदा कर्ज़ और ग्रुप की वित्तीय स्थिति देखते हैं। RBI के 2025 Directions बैंकों से यह भी अपेक्षा करते हैं कि वे प्रमोटर इक्विटी का स्रोत जाँचें और सुनिश्चित करें कि पैरेंट कंपनी के उधार को प्रोजेक्ट कंपनी में इक्विटी के रूप में न डाला जाए।
टाइटल, अनुमतियाँ और RERA
- साफ़ टाइटल। लेंडर की कानूनी टीम ज़मीन के टाइटल और दस्तावेज़ों की श्रृंखला का सत्यापन करेगी। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए विशेष रूप से ज़रूरी है कि वे टाइटल दस्तावेज़ों और सर्टिफिकेट का सत्यापन सीधे जारी करने वालों से करें।
- डिस्बर्समेंट से पहले अनुमतियाँ। RBI के Directions के तहत लोन सामान्य प्रक्रिया में सैंक्शन हो सकता है, लेकिन डिस्बर्समेंट तब तक रुकना चाहिए जब तक उधारकर्ता सरकारी और वैधानिक प्राधिकरणों से ज़रूरी मंज़ूरियाँ प्राप्त न कर ले। यही नियम NBFC और HFC पर भी लागू है।
- स्थानीय शब्दावली। ग्रेटर मुंबई में बिल्डिंग मंज़ूरी महानगरपालिका से IOD और फिर Commencement Certificate के ज़रिए होती है। महाराष्ट्र के बाकी ज़्यादातर हिस्सों में — ठाणे ज़िले के कस्बों सहित — बिल्डिंग परमिशन राज्य के एकीकृत विकास नियंत्रण नियमों (UDCPR) के तहत दी जाती है।
- RERA रजिस्ट्रेशन। RERA रजिस्ट्रेशन के बिना प्रोजेक्ट का विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या बिक्री नहीं हो सकती, और रजिस्ट्रेशन के लिए खुद अनुमतियाँ और कमेंसमेंट सर्टिफिकेट ज़रूरी हैं। कुछ लेंडर केवल RERA-पंजीकृत प्रोजेक्ट्स को फंड करते हैं।
प्रोजेक्ट लागत, फंडिंग योजना और प्रमोटर योगदान
लेंडर एक यथार्थवादी लागत अनुमान और साफ़ फाइनेंस के साधन (means of finance) चाहते हैं: कितना प्रमोटर से, कितना ग्राहकों के एडवांस से और कितना कर्ज़ से आएगा। कमर्शियल रियल एस्टेट – रेज़िडेंशियल हाउसिंग (CRE-RH) के रूप में वर्गीकृत आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए RBI लेंडरों को आकस्मिक (contingent) बिक्री प्राप्य राशि को प्रमोटर के योगदान का हिस्सा गिनने की अनुमति देता है।
जहाँ लोन RBI के प्रोजेक्ट-फाइनेंस ढाँचे के अंतर्गत आता है, वहाँ पहले डिस्बर्समेंट से पहले और भी शर्तें हैं — जिनमें फाइनेंशियल क्लोज़र (प्रोजेक्ट लागत के अधिकांश हिस्से के लिए बाध्यकारी व्यवस्थाएँ), दस्तावेज़ों में दर्ज अपेक्षित कम्प्लीशन तारीख (रियल एस्टेट के लिए, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की अपेक्षित तारीख) और लोन एग्रीमेंट में चरणबद्ध डिस्बर्समेंट शेड्यूल शामिल हैं।
बिक्री, प्राप्य राशि और कैश-फ्लो कवर
रियल एस्टेट लोन मुख्य रूप से बिक्री से चुकाए जाते हैं, इसलिए लेंडर इनका अध्ययन करते हैं:
- बिक्री की गति — यूनिट कितनी तेज़ी से बिक रही हैं, और कितना स्टॉक बिना बिका है।
- प्रतिबद्ध प्राप्य राशि (committed receivables) — बिकी हुई यूनिट के खरीदारों से अभी बाकी पैसा।
- कैश-फ्लो कवर — क्या प्रतिबद्ध प्राप्य राशि (और बिना बिके स्टॉक का मूल्य) अभी होने वाली लागत और बकाया कर्ज़ को कवर कर सकती है।
रेगुलेटर द्वारा तय कोई एक अनुपात नहीं है; हर लेंडर अपनी सीमाएँ लागू करता है।
सिक्योरिटी, एस्क्रो और MahaRERA खाता नियम
कंस्ट्रक्शन लेंडर आमतौर पर प्रोजेक्ट का मॉर्गेज और उसकी प्राप्य राशि का हाइपोथिकेशन लेते हैं, और पुनर्भुगतान एस्क्रो व्यवस्था के ज़रिए होता है। लेकिन महाराष्ट्र में MahaRERA का Order 56/2024 अपेक्षा करता है कि खरीदारों का भुगतान एक कलेक्शन खाते और एक 70% अलग खाते में जाए, जो किसी भी लियन या एस्क्रो से मुक्त होना चाहिए। इसलिए लेंडरों को पुनर्भुगतान 30% ट्रांज़ैक्शन खाते और विधिवत निकाली गई राशि के इर्द-गिर्द स्ट्रक्चर करना पड़ता है। RERA के तहत एग्रीमेंट फॉर सेल के ज़रिए बिक चुकी यूनिट को मॉर्गेज भी नहीं किया जा सकता। हमारी गाइड MahaRERA 70% खाता में और पढ़ें।
डिस्बर्समेंट कैसे काम करता है
- चरणबद्ध रिलीज़। राशि निर्माण की प्रगति और प्रमोटर की इक्विटी के अनुपात में जारी होती है।
- लेंडर का इंजीनियर। RBI के प्रोजेक्ट-फाइनेंस ढाँचे के तहत लेंडर का स्वतंत्र इंजीनियर या आर्किटेक्ट हर किस्त से पहले कम्प्लीशन के चरण को प्रमाणित करता है।
- मोरेटोरियम और पुनर्भुगतान। कई कंस्ट्रक्शन लोन में निर्माण के दौरान मूलधन पर मोरेटोरियम होता है, और बाद में बिक्री की वसूली से पुनर्भुगतान होता है।
- देरी। RBI के नियम रियल एस्टेट प्रोजेक्ट की अपेक्षित कम्प्लीशन तारीख को सीमाओं के भीतर — गैर-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए दो साल तक, शर्तों और अतिरिक्त प्रोविज़निंग के अधीन — बिना लोन को डाउनग्रेड किए आगे बढ़ाने की अनुमति देते हैं।
RBI के नियम जो हर डेवलपर को पता होने चाहिए
- ज़मीन खरीद के लिए बैंक फंडिंग नहीं। RBI के Directions कहते हैं कि बैंक निजी बिल्डरों को ज़मीन अधिग्रहण के लिए फंड-आधारित या नॉन-फंड-आधारित सुविधाएँ नहीं देगा, भले ही वह हाउसिंग प्रोजेक्ट का हिस्सा हो। बैंक निजी बिल्डरों को हर विशेष प्रोजेक्ट से जुड़े लोन के ज़रिए उधार देते हैं। फ़रवरी 2026 में REITs को बैंक लेंडिंग की अनुमति देते समय भी RBI ने यह प्रतिबंध बनाए रखा।
- अपनी मार्केटिंग में बैंक का नाम बताएँ। हाउसिंग प्रोजेक्ट को फाइनेंस करने वाले बैंकों को बिल्डर से अपेक्षा करनी होती है कि वह ब्रोशर और विज्ञापनों में मॉर्गेजी बैंक का नाम बताए, और यह लिखे कि ज़रूरत होने पर फ्लैटों की बिक्री के लिए बैंक का NOC दिया जाएगा। जब तक यह नहीं होता, राशि जारी नहीं की जाती।
- CRE और CRE-RH। बिक्री या लीज़ के लिए बनी प्रॉपर्टी के लिए बिल्डरों को दिए गए लोन कमर्शियल रियल एस्टेट (CRE) में वर्गीकृत होते हैं। आवासीय प्रोजेक्ट (FSI के 10% से अधिक व्यावसायिक जगह न होने पर) CRE-RH के रूप में पात्र होते हैं, जिस पर बैंकों के लिए कम रिस्क वेट लगता है — 100% की जगह 75%।
बैंक या NBFC: क्या बदलता है
ज़मीन फंडिंग पर बैंक प्रतिबंध उन NBFC और HFC पर उसी तरह लागू नहीं होता जो किसी बैंक समूह का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए शुरुआती चरण की ज़रूरतें अक्सर वही पूरी करते हैं। बैंक आमतौर पर कम लागत देते हैं, लेकिन नियम सख्त रखते हैं। हमारी तुलना बैंक, NBFC और वित्तीय संस्थान पढ़ें।
आवेदन से पहले की चेकलिस्ट
- ज़मीन के टाइटल दस्तावेज़ और टाइटल सर्च रिपोर्ट
- स्वीकृत नक्शे और कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (या मुंबई में IOD और CC)
- RERA रजिस्ट्रेशन, या उसकी स्पष्ट समय-सीमा
- लागत, फाइनेंस के साधन, बिक्री योजना और कैश फ्लो के साथ प्रोजेक्ट रिपोर्ट
- प्रमोटर और कंपनी के वित्तीय विवरण, और पूरे व चल रहे प्रोजेक्ट्स का विवरण
- चल रहे प्रोजेक्ट्स का बिक्री और वसूली डेटा
- मौजूदा उधार और सिक्योरिटी का विवरण
Biz Corp Solutions कैसे मदद करता है
हम बिल्डरों और डेवलपर्स के लिए ₹5 करोड़ से ₹500 करोड़ तक के कंस्ट्रक्शन फाइनेंस की व्यवस्था करते हैं। हम लेंडर के लिए तैयार फ़ाइल बनाने में मदद करते हैं, RERA के खाता नियमों के अनुसार फंडिंग को स्ट्रक्चर करते हैं और आपके प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त बैंकों, NBFC और वित्तीय संस्थानों से संपर्क करते हैं — हर चरण पर आपको अपडेट रखते हुए।
यह गाइड अक्टूबर 2026 तक के RBI के 2025 Directions और MahaRERA आदेशों पर आधारित है। लेंडरों की नीतियाँ अलग-अलग होती हैं और नियम समय-समय पर अपडेट होते रहते हैं।
