1. उधारकर्ता प्रोफ़ाइल और शुरुआती क्रेडिट अड़चन

  • जर्मनी से ₹6.00 करोड़ के रिएक्टर 180-दिन के यूज़ेंस लेटर ऑफ़ क्रेडिट (LC) पर आयात किए जाने थे, जिसे बैंक शुरू में टर्म लोन की सब-लिमिट मानने को तैयार नहीं था।
  • MIDC त्रिपक्षीय समझौते और MPCB सहमति की शर्तों के कारण मॉर्गेज प्रक्रिया अटक रही थी।
  • ट्रायल रन के दौरान समान मासिक किस्त रखने से दूसरे वर्ष का DSCR गिरकर 1.14x रह जाता था।

2. फ़ाइल और कैश-फ़्लो वॉटरफ़ॉल को कैसे स्ट्रक्चर किया गया

  • विस्तृत DPR और CMA तैयार कर ₹24.00 करोड़ टर्म लोन के भीतर ₹6.00 करोड़ की Capex Import LC सब-लिमिट स्वीकृत कराई (मशीनरी स्थापना के बाद LC परिपक्वता पर टर्म लोन में परिवर्तन)।
  • MIDC क्षेत्रीय कार्यालय की मॉर्गेज अनुमति और त्रिपक्षीय समझौते को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया।
  • 12 माह के मोरेटोरियम के बाद स्टेप-अप तिमाही किस्तें रखकर 9.35% दर पर 1.64x औसत DSCR और 1.32x न्यूनतम DSCR हासिल किया।

3. पहले बनाम बाद की स्वीकृति तुलना