1. उधारकर्ता प्रोफ़ाइल और शुरुआती क्रेडिट अड़चन

  • कंपनी को ₹19 करोड़ के नए रेलवे व PSU ऑर्डर मिले थे, जिनके लिए ₹6.00 करोड़ कैश क्रेडिट और ₹2.50 करोड़ परफ़ॉर्मेंस बैंक गारंटी आवश्यक थी।
  • मौजूदा बैंक ने ₹4.00 करोड़ से ऊपर किसी भी वृद्धि के लिए 100% अतिरिक्त अचल संपत्ति कॉलेटरल की शर्त रखी।
  • PSU खरीदारों से भुगतान 105 दिनों में आने के कारण 90-दिन के बुक-डेट नियम से मासिक ड्रॉइंग पावर (DP) ₹1.10 करोड़ घट जाती थी।

2. फ़ाइल और कैश-फ़्लो वॉटरफ़ॉल को कैसे स्ट्रक्चर किया गया

  • टंडन समिति की दूसरी विधि (MPBF) के तहत CMA डेटा तैयार किया और सरकारी/PSU प्राप्यों के लिए 120-दिन की बुक-डेट अवधि स्वीकृत कराई।
  • CGTMSE की हाइब्रिड सिक्योरिटी योजना (₹10 करोड़ तक पात्र) का उपयोग कर ₹8.50 करोड़ की लिमिट स्ट्रक्चर की: ₹4.20 करोड़ MIDC फैक्ट्री कॉलेटरल से और शेष ₹4.30 करोड़ CGTMSE गारंटी कवर के तहत।
  • PSU देनदार मार्जिन को 40% से घटाकर 25% और BG नकद FD मार्जिन को 25% से घटाकर 10% कराया।

3. पहले बनाम बाद की स्वीकृति तुलना