1. उधारकर्ता प्रोफ़ाइल और शुरुआती क्रेडिट अड़चन

  • 11.75% की दर से 10-वर्षीय LAP की मासिक EMI ₹24.86 लाख थी — जो 10% धारा 194-I TDS और मेंटेनेंस के बाद बचने वाले ₹25.05 लाख शुद्ध किराए का लगभग 100% हिस्सा खा जाती थी।
  • मालिक को भिवंडी में गोदाम खरीदने के लिए ₹6.00 करोड़ की आवश्यकता थी, किंतु NBFC ने ITR आय सीमा का हवाला देकर टॉप-अप से मना कर दिया।
  • पट्टा समझौते में हर 36 महीने में निर्धारित 15% किराया वृद्धि को पिछले ऋणदाता ने पात्रता में शामिल नहीं किया था।

2. फ़ाइल और कैश-फ़्लो वॉटरफ़ॉल को कैसे स्ट्रक्चर किया गया

  • लोन को सामान्य LAP से बदलकर सरकारी बैंक में 9.10% प्रति वर्ष पर 12-वर्षीय लीज़ रेंटल डिस्काउंटिंग (LRD) सुविधा में स्ट्रक्चर किया।
  • हर 3 साल में 15% अनुबंधित किराया वृद्धि और 10% TDS कटौती को शामिल कर 1.28x शुद्ध किराया DSCR प्रस्तुत किया।
  • त्रिपक्षीय एस्क्रो खाते के माध्यम से ₹24.00 करोड़ (₹37.50 करोड़ मूल्यांकन का 64% LTV) स्वीकृत कराया — जिससे ₹17.50 करोड़ का पुराना लोन चुकाकर ₹6.50 करोड़ की अतिरिक्त पूँजी मुक्त हुई।

3. पहले बनाम बाद की स्वीकृति तुलना