1. उधारकर्ता प्रोफ़ाइल और शुरुआती क्रेडिट अड़चन

  • केवल ITR नेट PAT (₹34 लाख) के आधार पर 55% FOIR पात्रता मात्र ₹2.45 करोड़ बनती थी — जो मौजूदा ₹3.10 करोड़ मूलधन से भी कम थी।
  • मौजूदा HFC ने फ़्लोटिंग दर बढ़ाकर 9.95% कर दी थी।
  • महाराष्ट्र के 0.30% MODT स्टांप ड्यूटी और ₹15,000 नोटिस ऑफ़ इंटिमेशन खर्च के बाद सटीक ब्रेक-ईवन महीना निकालना ज़रूरी था।

2. फ़ाइल और कैश-फ़्लो वॉटरफ़ॉल को कैसे स्ट्रक्चर किया गया

  • नॉन-कैश डेप्रिसिएशन (₹48 लाख), पार्टनर वेतन व पूँजी पर ब्याज और 12 माह के औसत बैंक बैलेंस (ABB) को जोड़कर सकल नकद आय आकलन तैयार किया।
  • अग्रणी बैंक से ₹4.20 करोड़ की स्वीकृति दिलाई: 8.55% पर ₹3.10 करोड़ होम लोन बैलेंस ट्रांसफर (140 bps की बचत) और 9.15% पर ₹1.10 करोड़ का 18-वर्षीय टॉप-अप लोन।
  • महाराष्ट्र MODT सहित कुल ₹1.48 लाख की स्विचिंग लागत मात्र 4.2 महीनों में वसूल हो गई और शेष 18 वर्षों में ₹54.60 लाख की शुद्ध ब्याज बचत हुई।

3. पहले बनाम बाद की स्वीकृति तुलना