आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ और आयकर अधिनियम, 1961 निरस्त हो गया। अगर आपका होम लोन है, तो 24(b) और 80C के नाम से जानी जाने वाली कटौतियाँ अब भी हैं, बस नए सेक्शन नंबरों के साथ। बड़ा सवाल पहले जैसा ही है: आप उन्हें ले पाएँगे या नहीं, यह आपकी चुनी हुई टैक्स व्यवस्था (tax regime) पर निर्भर करता है।
इस लेख में पुराने सेक्शन को नए सेक्शन से मिलाकर दिखाया गया है, हर व्यवस्था में क्या मिलता है यह बताया गया है, और ठाणे के एक वेतनभोगी कर्ज़दार का उदाहरण दिया गया है।
पुराना सेक्शन, नया सेक्शन
| लाभ | आयकर अधिनियम, 1961 | आयकर अधिनियम, 2025 | सीमा |
|---|---|---|---|
| ख़ुद रहने वाले घर का ब्याज | 24(b) | 22(1)(b) और 22(2) | सालाना ₹2 लाख (शर्तें पूरी न होने पर ₹30,000) |
| निर्माण-पूर्व ब्याज | 24(b) | 22(1)(c) | पाँच बराबर किस्तें, ख़ुद रहने वाले घर के लिए ₹2 लाख की सीमा के भीतर |
| किराए पर दिए घर का ब्याज | 24(b) | 22(1)(b) | कटौती पर कोई सीमा नहीं |
| मूलधन, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन | 80C | Schedule XV के साथ 123 | PF, बीमा और अन्य मदों के साथ कुल ₹1.5 लाख |
| पहले घर का ब्याज (2016-17 में मंज़ूर लोन) | 80EE | 130 | सालाना ₹50,000 |
| किफ़ायती घर का ब्याज (2019-22 में मंज़ूर लोन) | 80EEA | 131 | सालाना ₹1.5 लाख |
| हाउस प्रॉपर्टी घाटा वेतन के सामने सेट-ऑफ़ | 71(3A) | 109(1)(b) | सालाना ₹2 लाख |
| बचे घाटे को आगे ले जाना (carry forward) | 71B | 110 | आठ टैक्स ईयर, सिर्फ़ हाउस प्रॉपर्टी आय के सामने |
| नई टैक्स व्यवस्था | 115BAC | 202 | डिफ़ॉल्ट, जब तक आप बाहर न निकलें |
सीमाएँ नहीं बदलीं। एक बात ठीक करनी पड़ी: अगस्त 2025 में पारित अधिनियम में ख़ुद रहने वाले घर की ₹2 लाख की सीमा में निर्माण-पूर्व ब्याज शामिल नहीं था। वित्त विधेयक (Finance Bill), 2026 के क्लॉज़ 30 ने सेक्शन 22(2) में संशोधन करके इसे शामिल किया, पुराने क़ानून की तरह, 1 अप्रैल 2026 से। यह विधेयक 30 मार्च 2026 को वित्त अधिनियम, 2026 बना।
ब्याज: सेक्शन 22
जिस घर में आप ख़ुद रहते हैं (अधिनियम की भाषा में सेक्शन 21(6) के तहत शून्य वार्षिक मूल्य वाली प्रॉपर्टी), उस पर आप सालाना ₹2 लाख तक ब्याज घटा सकते हैं, लेकिन सिर्फ़ तब जब:
- लोन घर ख़रीदने या बनाने के लिए लिया गया हो, और
- लोन लेने वाले टैक्स ईयर की समाप्ति से पाँच साल के भीतर ख़रीद या निर्माण पूरा हो जाए, और
- आपके पास लेंडर का ब्याज प्रमाणपत्र (interest certificate) हो।
इनमें से कोई शर्त पूरी न हो, या लोन मरम्मत या रिनोवेशन के लिए हो, तो सीमा ₹30,000 है। ₹2 लाख अधिकतम दो ख़ुद रहने वाले घरों के लिए मिली-जुली सीमा है, हर घर के लिए ₹2 लाख नहीं।
किराए पर दिए घर के ब्याज पर कोई सीमा नहीं है। अगर ब्याज और 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन किराए से ज़्यादा हो जाएँ, तो हाउस प्रॉपर्टी का घाटा बनता है। पुरानी व्यवस्था में इसमें से ₹2 लाख तक वेतन के सामने सेट-ऑफ़ हो सकता है (सेक्शन 109) और बाक़ी आठ टैक्स ईयर तक सिर्फ़ हाउस प्रॉपर्टी आय के सामने आगे ले जाया जा सकता है (सेक्शन 110)।
अगर आप लोन दूसरे लेंडर के पास ले जाते हैं, तो नए लेंडर के प्रमाणपत्र में नए लोन का ब्याज भी दिखना चाहिए (सेक्शन 22(4))। टॉप-अप से आपके दावे पर क्या असर पड़ता है, यह हमारी बैलेंस ट्रांसफर और टॉप-अप गाइड में बताया गया है।
मूलधन, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन: सेक्शन 123
सेक्शन 123 के तहत Schedule XV की मदों के लिए सालाना ₹1.5 लाख तक कटौती मिलती है। Schedule के पैराग्राफ़ 3 में बैंक, सहकारी बैंक, LIC, NHB, हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनी या कुछ नियोक्ताओं से लिए गए होम लोन की चुकौती, और साथ में स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फ़ीस और ट्रांसफ़र के अन्य ख़र्च आते हैं।
ध्यान देने वाली बातें:
- PF, जीवन बीमा, ELSS, ट्यूशन फ़ीस वग़ैरह के साथ यह एक ही ₹1.5 लाख का पूल है। कई वेतनभोगियों का यह पूल सिर्फ़ PF से ही भर जाता है।
- स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ उसी साल गिने जाते हैं जिस साल आप इन्हें चुकाते हैं। ठाणे के फ़्लैट पर अकेले ये ख़र्च ₹1.5 लाख से ज़्यादा हो सकते हैं; देखें ठाणे और बदलापुर में घर ख़रीदने की पूरी लागत।
- ब्याज (जिसका दावा सेक्शन 22 में होता है) और निर्माण पूरा होने के बाद की मरम्मत या रिनोवेशन इसमें नहीं गिने जाते।
- कब्ज़ा मिलने वाले टैक्स ईयर की समाप्ति से पाँच साल के भीतर घर बेचने पर उस घर के लिए ली गई सेक्शन 123 की सारी कटौतियाँ बिक्री वाले साल में आपकी आय में वापस जोड़ दी जाती हैं।
नई टैक्स व्यवस्था: क्या मिलता है और क्या नहीं
सेक्शन 202 की नई टैक्स व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है। वेतनभोगी व्यक्ति हर साल रिटर्न भरते समय पुरानी व्यवस्था चुन सकता है (सेक्शन 202(4))। बिज़नेस आय वालों को रिटर्न की नियत तारीख़ तक विकल्प चुनना होता है, और वह आगे भी लागू रहता है: वे नई व्यवस्था में सिर्फ़ एक बार वापस जा सकते हैं।
| नई व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट) | पुरानी व्यवस्था (चुनने पर) | |
|---|---|---|
| ख़ुद रहने वाले घर का ब्याज | नहीं मिलता | ₹2 लाख तक |
| मूलधन, स्टांप ड्यूटी (सेक्शन 123) | नहीं मिलता | ₹1.5 लाख तक |
| सेक्शन 130 और 131 | नहीं मिलता | पात्र होने पर मिलता है |
| किराए पर दिए घर का ब्याज | उसके किराए के सामने मिलता है | मिलता है |
| हाउस प्रॉपर्टी घाटा वेतन के सामने | नहीं मिलता, और घाटा ख़त्म हो जाता है | ₹2 लाख तक, बाक़ी आगे ले जा सकते हैं |
| वेतन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹75,000 | ₹50,000 |
| रिबेट | ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स शून्य | ₹5 लाख तक की आय पर टैक्स शून्य |
यानी नई व्यवस्था में किराए के फ़्लैट का ब्याज उसका किराया पूरी तरह ख़त्म कर सकता है, लेकिन उससे आगे का घाटा न अभी काम आता है न बाद में (सेक्शन 202(3))।
सेक्शन 130 और 131 (पुराने 80EE और 80EEA)
ये सिर्फ़ तय अवधि में मंज़ूर हुए लोन के लिए हैं: सेक्शन 130 के लिए 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 (लोन ₹35 लाख तक, घर की क़ीमत ₹50 लाख तक), और सेक्शन 131 के लिए 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 (स्टांप ड्यूटी मूल्य ₹45 लाख तक)। मंज़ूरी की तारीख़ पर आपके नाम कोई दूसरा घर नहीं होना चाहिए। 2026 में लिया गया नया लोन इसके लिए पात्र नहीं है। अगर आप पहले से ये कटौतियाँ ले रहे हैं, तो ये पुरानी व्यवस्था में सेक्शन 22 के अलावा जारी रहती हैं।
जॉइंट होम लोन
अगर फ़्लैट तय हिस्सों में सह-स्वामित्व (co-owned) में है, तो नए अधिनियम का सेक्शन 24 हर सह-मालिक पर अलग से टैक्स लगाता है, और हर एक को ख़ुद रहने वाले घर की राहत ऐसे मिलती है मानो वह अकेला मालिक हो। व्यवहार में:
- हर व्यक्ति सह-मालिक और सह-कर्ज़दार (co-borrower) दोनों होना चाहिए, और अपने हिस्से की EMI अपने खाते से भरनी चाहिए।
- हर व्यक्ति अपने भुगतान के अनुपात में ₹2 लाख तक ब्याज और अपनी ₹1.5 लाख की सेक्शन 123 सीमा में मूलधन का दावा कर सकता है।
- हर व्यक्ति अपनी टैक्स व्यवस्था ख़ुद चुनता है। एक जीवनसाथी पुरानी व्यवस्था में दावा कर सकता है, जबकि दूसरा नई व्यवस्था में रह सकता है।
निर्माणाधीन फ़्लैट
फ़्लैट बनते समय ब्याज की कोई कटौती नहीं मिलती। जिस टैक्स ईयर में निर्माण पूरा होता है, उससे पहले चुकाया गया ब्याज (pre-EMI) जोड़कर उसे पाँच बराबर किस्तों में उस साल के ब्याज के साथ क्लेम करें, सब कुछ ख़ुद रहने वाले घर की ₹2 लाख की सीमा के भीतर। अगर लोन वाले साल की समाप्ति से निर्माण पूरा होने में पाँच साल से ज़्यादा लगें, तो सीमा घटकर ₹30,000 रह जाती है। कब्ज़े से पहले चुकाया गया मूलधन आम तौर पर सेक्शन 123 में नहीं घटता।
निर्माण-पूर्व ब्याज का अनुमान लगाने के लिए हमारा pre-EMI कैलकुलेटर इस्तेमाल करें, और पढ़ें कि निर्माणाधीन फ़्लैट के लिए लोन लेने से पहले क्या जाँचें।
FY 2025-26 बनाम टैक्स ईयर 2026-27
- FY 2025-26 (31 मार्च 2026 तक की आय) पर अब भी 1961 के अधिनियम के तहत टैक्स लगता है। 2026 में भरे जाने वाले रिटर्न में 24(b), 80C और 115BAC लागू होते हैं।
- टैक्स ईयर 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027) 2025 के अधिनियम के तहत पहला साल है, नए सेक्शन नंबरों के साथ। "असेसमेंट ईयर" शब्द अब नहीं है।
- पिछले सालों से आगे लाया गया हाउस प्रॉपर्टी घाटा नए अधिनियम के सेक्शन 536(2)(m) के तहत जारी रहता है। 1 अप्रैल 2026 के बाद बिक्री के कारण वापस लिया गया सेक्शन 80C का दावा बिक्री वाले साल में टैक्स योग्य होता है।
उदाहरण: ठाणे का वेतनभोगी कर्ज़दार
मान्यताएँ: कुल वेतन ₹18 लाख, ख़ुद रहने वाले फ़्लैट पर 8.5% ब्याज पर 20 साल के लिए ₹50 लाख का लोन (EMI लगभग ₹43,391), और सालाना ₹60,000 कर्मचारी PF। पहले साल ब्याज लगभग ₹4,21,000 और मूलधन लगभग ₹99,500 है। यह सिर्फ़ उदाहरण के लिए है, और इसमें प्रोफ़ेशनल टैक्स, स्वास्थ्य बीमा और अन्य कटौतियाँ शामिल नहीं हैं।
| पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था | |
|---|---|---|
| कुल वेतन | ₹18,00,000 | ₹18,00,000 |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹50,000 | ₹75,000 |
| ब्याज, सेक्शन 22 (सीमा सहित) | ₹2,00,000 | शून्य |
| सेक्शन 123 (PF + मूलधन, सीमा सहित) | ₹1,50,000 | शून्य |
| कर योग्य आय | ₹14,00,000 | ₹17,25,000 |
| सेस से पहले टैक्स | ₹2,32,500 | ₹1,45,000 |
| 4% सेस सहित टैक्स | ₹2,41,800 | ₹1,50,800 |
कर्ज़दार ₹4,21,000 ब्याज चुका रहा है, फिर भी नई व्यवस्था लगभग ₹91,000 सस्ती पड़ती है। कम स्लैब दर होम लोन कटौतियों से ज़्यादा फ़ायदा देती हैं। पुरानी व्यवस्था आम तौर पर तभी फ़ायदेमंद होती है जब कुल कटौतियाँ इससे काफ़ी ज़्यादा हों।
अगर यही फ़्लैट किराए पर दिया होता ₹15,000 महीने (सालाना ₹1,80,000) पर: ₹54,000 की 30% कटौती और ₹4,21,000 ब्याज घटाने के बाद घाटा ₹2,95,000 बनता है। पुरानी व्यवस्था में ₹2,00,000 वेतन के सामने सेट-ऑफ़ होते हैं और ₹95,000 आगे ले जाए जाते हैं। नई व्यवस्था में किराया असल में टैक्स-फ़्री हो जाता है, लेकिन ₹2,95,000 का घाटा बेकार चला जाता है। रिटर्न भरने से पहले दोनों तरह से अपने आँकड़े निकालें, या अपने CA से पूछें।
Biz Corp Solutions कैसे मदद करता है
हम ठाणे, बदलापुर और पूरे महाराष्ट्र के वेतनभोगी और स्व-रोज़गार कर्ज़दारों को होम लोन, बैलेंस ट्रांसफर और लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी के लिए बैंकों और HFC की तुलना करने में मदद करते हैं, और यह ध्यान रखते हैं कि टैक्स के समय ज़रूरी ब्याज और मूलधन प्रमाणपत्र आपको मिलें। लोन का अंतिम फ़ैसला लेंडर करता है, और आपकी टैक्स स्थिति आपका CA तय करे। हमारी होम लोन और लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी सेवाएँ देखें।
यह लेख राजपत्र में प्रकाशित आयकर अधिनियम, 2025, वित्त विधेयक, 2026 और 21 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध टैक्स विश्लेषण पर आधारित है। यह सामान्य जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं; अपनी स्थिति चार्टर्ड अकाउंटेंट से पक्की करवा लें।
