MSME हमारे पास जो कैश फ़्लो की दिक़्क़तें लेकर आते हैं, उनमें देर से भुगतान सबसे आम है। MSME मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट आर्थिक सर्वेक्षण के अनुमान का हवाला देती है कि MSME के लगभग ₹8.1 लाख करोड़ देर से भुगतान में फँसे हैं। क़ानून माइक्रो और स्मॉल सप्लायरों को तीन मज़बूत औज़ार देता है: भुगतान की सख़्त समय-सीमा, दंडात्मक ब्याज दर, और ऐसा टैक्स नियम जो ख़रीदार के लिए देर से भुगतान को महँगा बनाता है।

संरक्षण किसे है

MSMED Act, 2006 की sections 15–24 में दिया संरक्षण माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ सप्लायर के लिए है। मीडियम एंटरप्राइज़ इसमें शामिल नहीं हैं: 2023 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि मीडियम एंटरप्राइज़ सप्लायर को ख़रीदार पर Bank Rate के तीन गुना ब्याज की देनदारी नहीं बनती। अपना Udyam registration अपडेट रखें, क्योंकि ख़रीदार और फ़ैसिलिटेशन काउंसिल इसे माँगते हैं।

45 दिन का नियम (section 15)

ख़रीदार को भुगतान करना होगा:

  • लिखित रूप में तय तारीख़ पर या उससे पहले, और यह अवधि स्वीकृति या मानी गई स्वीकृति के दिन से कभी 45 दिन से ज़्यादा नहीं हो सकती; या
  • लिखित में कुछ तय न हो तो appointed day से पहले, यानी स्वीकृति के 15 दिन बाद का दिन।

स्वीकृति (acceptance) वह दिन है जब माल पहुँचा या सेवा दी गई। अगर ख़रीदार 15 दिन के भीतर लिखित आपत्ति करता है, तो वह दिन जब सप्लायर आपत्ति दूर करता है; 15 दिन में लिखित आपत्ति न हो तो माल पहुँचने का दिन मानी गई स्वीकृति है। "90 दिन में भुगतान" लिखा परचेज़ ऑर्डर सीमा नहीं बढ़ाता: क़ानून इसे 45 पर सीमित कर देता है।

देर से भुगतान पर ब्याज (section 16)

अगर ख़रीदार समय-सीमा चूकता है, तो नियत तारीख़ के अगले दिन से, अनुबंध में कुछ भी हो, उसे RBI द्वारा अधिसूचित Bank Rate के तीन गुना पर मासिक चक्रवृद्धि ब्याज देना होता है। Section 17 ख़रीदार को यह राशि उस ब्याज सहित चुकाने के लिए उत्तरदायी बनाती है।

Bank Rate ब्याज दर (3×) अवधि
5.50% 16.50% सालाना 5 दिसंबर 2025 से 6 अक्टूबर 2026
5.75% 17.25% सालाना 7 अक्टूबर 2026 से

7 अक्टूबर 2026 को RBI ने रेपो रेट 5.50% किया, तब Bank Rate 5.75% हो गया (रेट बढ़ोतरी का मतलब देखें)। देरी की अवधि में दर बदलने पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने V.K. Patel & Co v. Simplex Infrastructure (2024) में कहा कि हर मासिक चक्र के लिए उस समय लागू दर ली जाए।

उदाहरण

एक माइक्रो एंटरप्राइज़ ठेकेदार का ₹10,00,000 का बिल 45 दिन की उधारी के साथ 1 अगस्त 2026 को स्वीकार होता है, यानी भुगतान का आख़िरी दिन 15 सितंबर 2026 है। 15 मार्च 2027 तक यह बकाया है।

  • ब्याज 16 सितंबर 2026 से, मासिक चक्रवृद्धि के साथ, लगता है।
  • पहला महीना 16.50% पर और अगले पाँच महीने 17.25% पर।
  • 15 मार्च 2027 तक देय ब्याज: ₹88,738, यानी दावा ₹10,88,738।
  • अगर लिखित उधार अवधि नहीं होती, तो भुगतान 15 दिन में देय होता और उसी तारीख़ तक ब्याज ₹1,03,150 होता।

हमारा MSME विलंबित भुगतान ब्याज कैलकुलेटर यह हर बिल के लिए, आंशिक भुगतान सहित, निकालता है और दावे के साथ लगाने लायक महीनेवार गणना दिखाता है।

ख़रीदार की टैक्स लागत: section 43B(h), अब section 37(2)(g)

Finance Act, 2023 ने Income-tax Act, 1961 में section 43B(h) जोड़ी: section 15 की समय-सीमा के बाद माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ को देय राशि सिर्फ़ असल भुगतान होने पर ही कटौती योग्य है।

Income-tax Act, 2025 ने 1 अप्रैल 2026 से 1961 के क़ानून की जगह ले ली। यही नियम अब section 37(2)(g) है, और वित्त मंत्रालय ने 21 जुलाई 2026 को राज्यसभा में एक उत्तर में इसकी पुष्टि की। दो बातें अहम हैं:

  • कोई छूट नहीं। Section 37(3) इस धारा की ज़्यादातर मदों को रिटर्न की नियत तारीख़ तक भुगतान होने पर उसी साल घटाने देती है, लेकिन clause (g) को साफ़ तौर पर बाहर रखती है। 31 मार्च को बकाया MSE बिल उस साल के लिए अस्वीकार होता है और जिस साल चुकाया जाए उस साल स्वीकार होता है।
  • कौन-सा क़ानून लागू। 31 मार्च 2026 को ख़त्म हुए साल के लिए 1961 के क़ानून की section 43B(h) लागू है। 31 मार्च 2027 को ख़त्म होने वाले tax year 2026-27 के लिए section 37(2)(g) लागू है।

इसके अलावा, MSMED Act की section 23 कहती है कि section 16 का ब्याज कभी कटौती योग्य नहीं है, और section 22 के तहत जिस ख़रीदार के खातों का ऑडिट होता है उसे माइक्रो और स्मॉल सप्लायरों का बकाया मूलधन और ब्याज दिखाना होता है।

ऊपर के उदाहरण में, अगर ₹10,00,000 का बिल 31 मार्च 2027 को भी बकाया है, तो ख़रीदार tax year 2026-27 के लिए वह कटौती खो देता है और उस पर एक साल पहले टैक्स भरता है, साथ ही ऐसा ब्याज भी देना पड़ता है जिसे घटाया नहीं जा सकता।

सप्लायर वसूली कैसे करे

  1. sections 15 और 16 तथा अपना Udyam नंबर लिखकर, आज तक के ब्याज के साथ रिमाइंडर भेजें।
  2. अपने राज्य की माइक्रो एवं स्मॉल एंटरप्राइज़ेज़ फ़ैसिलिटेशन काउंसिल (MSEFC) को विवाद भेजें (section 18)। वह भारत में कहीं भी स्थित ख़रीदार के ख़िलाफ़ दावा सुन सकती है।
  3. ऑनलाइन दर्ज करें। MSME मंत्रालय के अनुसार 15 अक्टूबर 2025 से सभी नए विलंबित भुगतान मामले MSME ODR पोर्टल पर दर्ज होते हैं, जिसे पुराने MSME Samadhaan पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। ODR प्रक्रिया conciliation और arbitration से पहले आपसी समझौते की कोशिश से शुरू होती है।
  4. पहले conciliation, फिर arbitration। Conciliation विफल होने पर काउंसिल ख़ुद arbitration करती है या मामला किसी संस्था को भेजती है। क़ानून के अनुसार संदर्भ का फ़ैसला 90 दिन में होना चाहिए।
  5. अवॉर्ड की सुरक्षा। अवॉर्ड रद्द कराने के लिए अदालत जाने वाले ख़रीदार को पहले उसका 75% जमा करना होता है (section 19)।

2026 के संशोधन से क्या बदलता है

संसद ने अगस्त 2026 में MSMED (Amendment) Bill, 2026 पारित किया। अधिसूचना S.O. 5575(E) पर टिप्पणियों के अनुसार कई प्रावधान 15 अक्टूबर 2026 से लागू हुए, जिनमें केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए MSME इनवॉइस TReDS से निपटाने की नई बाध्यता, MSME वर्गीकरण का नया आधार, और क्रमिक जुर्माने शामिल हैं। मध्यस्थता (mediation) की समय-सीमा और चुनौती छह महीने से ज़्यादा लंबित रहने पर अवॉर्ड का कम से कम 50% सप्लायर को देने वाले प्रावधान 21 अक्टूबर 2026 तक अधिसूचित नहीं हुए थे। Sections 15 और 16 नहीं बदलीं, इसलिए 45 दिन का नियम और ब्याज दर ऊपर जैसे ही हैं।

ख़रीदार क्या करें

  • पता करें कि कौन-से वेंडर माइक्रो या स्मॉल हैं (Udyam सर्टिफ़िकेट माँगें) और अपने पेएबल्स सिस्टम में उन्हें चिह्नित करें।
  • 45 दिन या उससे कम की उधार अवधि लिखित में तय करें; इससे लंबी अवधि वैसे भी सीमित हो जाती है।
  • कटौती बचाने के लिए 31 मार्च से पहले MSE का बकाया चुकाएँ।
  • नकदी कम हो तो टैक्स में न घटने वाला 17.25% चक्रवृद्धि ब्याज देने के बजाय वर्किंग कैपिटल सीमा से भुगतान करें या TReDS पर इनवॉइस निपटाएँ।

सप्लायर क्या करें

  • हर PO या अनुबंध पर उधार अवधि (45 दिन या कम) लिखित में रखें, और डिलीवरी व स्वीकृति की तारीख़ें दर्ज करें।
  • आपत्तियाँ और उनका समाधान लिखित में रखें, क्योंकि इनसे स्वीकृति की तारीख़ बदलती है।
  • बकाया बिलों पर हर महीने नज़र रखें और हर महीने लागू दर पर ब्याज माँगें।
  • ख़रीदार से वसूली के दौरान कमी पूरी करें: बिल डिस्काउंटिंग, TReDS या कैश क्रेडिट सीमा वर्किंग कैपिटल खोल सकती है। हमारी कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए वर्किंग कैपिटल गाइड विकल्प समझाती है, और हमारी बैंक गारंटी गाइड बताती है कि नए अनुबंधों पर सिक्योरिटी का ख़र्च कैसे कम रखें।

Biz Corp Solutions कैसे मदद करती है

जब आपका दावा चल रहा हो, हम MSME को बैंकों, NBFC और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से कैश क्रेडिट, बिल डिस्काउंटिंग और प्राप्तियों पर TReDS फ़ाइनेंस दिलाने, और मौजूदा सीमाएँ उनकी ऑर्डर बुक से मेल खाती हैं या नहीं यह जाँचने में मदद करते हैं। हमारी वर्किंग कैपिटल और प्रोजेक्ट फंडिंग सेवाएँ देखें।

यह लेख MSMED Act, Income-tax Act, 2025, RBI की घोषणाओं, MSME मंत्रालय के प्रकाशनों और 21 अक्टूबर 2026 तक की टिप्पणियों पर आधारित है। यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी या टैक्स सलाह नहीं। क़ानून आपके अनुबंध पर लागू होता है या नहीं, और कितनी राशि मिलेगी, यह फ़ैसिलिटेशन काउंसिल, ट्रिब्यूनल या अदालत तय करती है।